Thursday, November 21, 2019

समाजों में एक बुनियादी गलती यह की जाती है कि हमने युवाओं के दिमाग में कहीं न कहीं यह बात डाल दी है कि स्त्री एक वस्तु है, एक चीज है, जिस पर आप कब्जा कर सकते हैं।

दुनिया में महिलाओं को इन्सान समझने के लिए लोग कितना वक्त लगाएंगे ये तो नहीं पता, लेकिन हम बच्चों को अच्छी परवरिश तो दे ही सकते हैं, ताकि वे महिलाओं को वस्तु न समझें. उन्हें सही समय पर सेक्स एजुकेशन दें, ताकि वो इधर-उधर से गलत चीज़ें न सीखें. सबसे ज़रूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को गुड और बैड टच का मतलब समझाएं और उन्हें आवाज़ उठाने को प्रेरित करें, चुप रहने को नहीं.

पुरुषों द्वारा रेप करने की पहली वजह तो ये है कि हमारी सोसाइटी कितने ही लोगों के लिए पावर दिखाने का माध्यम बन जाती है. ऐसे लोग अपना हक़ जमाकर अपनी एक आइडेन्टिटी क्रिएट करना चाहते हैं. दूसरा कारण है कि अगर कोई लड़की उन्हें पसंद आ जाती है, वो उन्हें लगता है कि वो हर हाल में मिलनी चाहिए, चाहे वो हां कहे या ना. तीसरी अहम वजह है कि वे अपनी काम उत्तेजना को कंट्रोल नहीं कर पाते. न ही वे इसे कंट्रोल करना चाहते हैं. ऐसे लोगों के लिए रेप बदला लेने का माध्यम भी बन जाता है...

सोसाइटी में जो नजरिया है औरतों के प्रति, वो यही है कि अगर वो मॉडर्न है तो उसे लोग 'तैयार' मानते हैं. वो उसके साथ कुछ भी करने के लिए सोचते हैं. हमें सिखाया ही नहीं गया कि लड़कियां भी लड़कों जैसी ही होती हैं, उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ सेक्स नहीं करना चाहिए. ..और पत्नी व्रता बने ....रेप होना बन्द हो जायेगा ...

सभी माता पिता से मेरा निवेदन है....कि अपने बेटो को अच्छी शिक्षा दे ....

विचारक :- धर्मवीर ठाकुर
बुरा लगे तो माफ करना ...

मर्द धर्म के नाम पर नंगे रहते है ...नंगे होकर सड़को पर घुमते है..मंदिर  भी जाते है ..फिर भी उन्हे सम्मान मिलता है ..और वो ब्रहमचारी कहलाते है ... पूरा समाज और औरते  उनका सम्मान करती है ..उन्हे  पूजती है ...
जैसे नागा साधु और जैन मुनी .....

अगर कोई महिला भी धर्म के नाम पर ऐसे ही निर्वस्त्र होकर रहे ..तो क्या पूरा समाज  और पुरूष उन महिलाओ को सम्मान की नज़र से देखेंगे..उसे ब्रहम चारिनी कहकर उसकी पूजा करेंगे ...? नही ....

अरे जब ऐसे पुरुष नग्न होकर घूमते हैं तो कोई भी महिला उनसे जाकर छेड़खानी नहीं करती है अथवा उनका शोषण करने की नहीं सोचती है लेकिन....  महिला का जरा भी अंग खुला हुआ दिखे पुरुष उसको भोग की वस्तु समझता है और अधिक से अधिक उसके संपर्क में आने की कोशिश करता है पुरुष का यह मानना है जो महिला अधिक से अधिक अंग प्रदर्शन कर रही है वह पुरुषों को आमंत्रण कर रही है इसका मतलब मर्द भी अपना शरीर खुला रखकर महिलाओ की काम भावनाओ को भडका रहे है भावनाये तो मर्द और औरत दोनो की ही होती है ना, तो मर्द भी औरतो की भावनाओ का ख्याल रखे |
मर्द धर्म और ब्रहमचारी होने के नाम पर नंगे ना रहे  , इससे महिलाओ की भावनाये भी भड़कती है |

लड़कियों के शॉर्ट ड्रेस पर चिल्लाने वालो से मेरा ये सवाल है ..

विचारक : धर्मवीर ठाकुर ..
लडकियां क्या पहनती हैं, क्या खाती हैं, कहां जाती हैं, किससे बात करती हैं, किसके साथ घूमती हैं, लोगों को इन सब बातों से ऐतराज है। लडकियों को कैसे कपड़े पहनने हैं, उसे कब घर से बाहर रहना है, कब घर वापिस आना है, यह हमारा समाज तय करता है। हमारा समाज आज बहुत विकसित हो चुका है परंतु लोगों की सोच आज भी छोटी ही है।
यदि लडके रात भर घर से बाहर रहते हैं, शॉर्ट पहनकर घूमते हैं, पर उन्हें कोई नहीं रोकता पर यदि लड़की यही सब करती है, तो समाज को अचानक बहुत ऐतराज हो जाता है। यह दिखाता है कि लडकियों के कपडे़ अभी तक उतने छोटे नहीं हुए हैं जितनी लोगों की सोच गिरी हुई है। लोग जब तक लडकियों को सम्मान की नजर से नहीं देखेंगे तब तक उनके चरित्र पर सवाल ही उठाए जाएंगे। कुछ घटिया लोग तो बच्चियों का भी रेप करते हैं, इसके लिए लडकियों के कपडों को दोषी करार देना बिल्कुल गलत होगा। ऐसे घटिया लोगों की सोच को सुधारना जरूरी है न कि लडकियों को साड़ी पहनाने की।

अगर इंसान की सोच छोटी है तभी लड़की के कपड़ों से फ़र्क़ पड़ता है।

लोगों की नज़र ना बुर्खे वाली औरत को बख़्शती है ना ही कुछ महीने की बच्ची को। लड़कियों के साथ छेड़खानी, रेप और गंदी हरकतें होती रहती हैं। लोग कपड़े नहीं देखते, बस यही देखते हैं कि वह एक लड़की है।

हालाँकि यह कहना सही है कि लड़की को माहोल देख कर कपड़े पहनने चाहिए। किसी समुदाय की मान-मर्यादा, कल्चर इत्यादि को ध्यान में रखना चाहिए। जैसे अगर किसी गाँव में जाएँ तो ज़्यादा छोटे कपड़े ना पहने क्योंकि वहाँ के लोगों की परम्परा और कल्चर वैसा नहीं है। लेकिन और कहीं जाने में यह परेशानी नहीं आनी चाहिए। अगर लड़की शहर में रहती है, उस ही जगह पली बड़ी है, तो उसके कपड़ों से उसके चरित्र का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए। सबको छूट है कि वे कुछ भी पहने, कहीं भी जाएँ और सुरक्षित रहें। इस छोटी और नीच सोच को बदलना होगा कि अगर लड़की छोटे कपड़े पहनती है, तो उसके साथ कुछ भी कर सकते हैं और अगर कोई लड़की सलवार क़मीज़ पहनती है, तो नहीं। हर महिला की, हर इंसान की इज़्ज़त करनी चाहिए।

यहाँ सोच बदलने की ज़रूरत है, कपड़ों को नहीं।

वैसे! लड़कियां कुछ भी पहनें किन्तु पुरूषों की नज़र उन्हीं पर रहती है। अक्सर लोगों को यही कहते सुना है कि लड़कियों के छोटे कपड़े ही इस तरह की वारदातों का कारण होते हैं। अगर खबरों पर गौर किया जाए तो रेप केस में 5 साल की बच्ची से लेकर अधेड़ उम्र की महिला तक इस तरह की घटनाओं का शिकार बनी है। एक बुरके में रहने वाली औरत को भी रास्ते में कई बार पुरूषों द्वारा छेड़खानी का सामना करना पड़ता है। क्या उस समय भी वह महिला छोटे कपड़ों में होती है?

भारत एक आजाद देश है। यहां हर व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार बोलने, खाने और पहनने का अधिकार है तो क्यों महिलाएं केवल पुरूषों की सोच के लिए अपना पहनावा बदलें! लड़की छोटे कपड़े पहने या बड़े, पुरूषों के सामने से गुजरते वक्त उसे किसी न किसी प्रकार की फब्ती को झेलना पड़ता ही है। पता नहीं लड़कियों के कपड़े ज़्यादा छोटे हैं या हमारे समाज की सोच…!

आशा करता हूँ कि आप समझ गए होगे…. धन्यवाद

विचारक :- धर्मवीर ठाकुर
मैं भी दिल्ली मेट्रो मे सफर करता हूँ ..मेट्रो मे 2% से 3% कपल को छोड़ दिया जाये तो ज़्यादातर कपल ऐसी कोई हद मेट्रो मे पार नही करते जो अश्लीलता मे आती है ...

सबसे पहले मैं ये साफ कर देना चाहता हूँ कि मैं किसी भी तरह की अश्लीलता और घटियापन को बिलकुल भी पसंद नहीं करता और मैं इसका घोर विरोधी हूँ, हालांकि जगह के हिसाब से अश्लीलता की परिभाषा तय होती है। लेकिन मैं ये भी बताना चाहता हूँ की मेट्रो सिटी मे कपल का एक दुसरे का हाथ पकड कर चलना, एक दुसरे के कंन्धे पर सिर रखना, एक दुसरे से मिलने या अलग होने पर हाथ मिलाना या गले मिलना या कपल का कभी कभी एक दुसरे के माथे को चुमना(जो कामुक ना हो) सामान्य बात है, कानूनन मेट्रो सिटी मे ये सभी अश्लीलता के दायरे मे नही आते है ये एक दुसरे के प्रति अपने प्यार की अभिव्यकती है बुजूर्गो और आम लोगो को भी ये बात समझना चाहिये, और साथ मे हर कपल को भी अपनी मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए की उनके द्वारा किसी भी तरह की अश्लीलता ना हो l  

लेकिन इस विडियो वाले केस मे ये साफ नही है की यहाँ किसी तरह की कोई अश्लीलता हुई है या नही, हो सकता है उस लडका और लड़की ने ऐसी कोई हरकत की हो जो उस महिला को गलत या अश्लील लगा हो, जिसका उस महिला ने विरोध किया है, और ये बहोत अच्छी बात है ऐसी अश्लील हरकतो का विरोध सभी को करना चाहिए l लेकिन इस विरोध मे हम सब ये क्यो भूल जाते है कि विरोध करने का भी एक सही तरीका होता है उस लड़की और उस लड़के ने जो गलती की उन्हे उनकी गलती से ज़्यादा बडी सजा मिली है, उस औरत को उस लड़के को भी विडिओ बनाने से रोकना चाहिये था जिसने ये सब अपने मोबाइल मे रिकार्ड किया और उस लड़के को भी इतनी तमीज होनी चाहिये थी की वो ये विड़ीयो बनाकर वायरल न करे l शर्म आनी चाहिये ऐसे लोगो को जो दूसरो को नेतिकता का पाठ पढ़ाते है और खुद अपनी मर्यादा भूल जाते है l 

क्या उस महिला या उस लड़के ने ये सोचा की इस विड़ीयो की वजह से उस लड़की और उस लड़के को कितनी परेशानियो का सामना करना पढ़ेगा, अब हर कोई उस लड़की को गलत नजरिये से देखेगा, लोग उसे चरित्रहीन कहेंगे, अब लड़को को उस लड़की पर खुलकर कमेंट करने का अधिकार मिल जायेगा, उस लड़की की पढ़ाई मे दिक्कते आनी शुरू हो जायेगी, कुछ महीनो तक उसका घर से बाहर निकलना बंद हो जायेगा, भविष्य में शादी मे समस्या आ सकती है और वो इन सब चीजो से निकल भी गई तो समय समय पर उसे इस घटना की याद दिलाने वाले लोग और उसे चरित्रहीन कहने वाले लोग मिल ही जायेंगे, उस लड़की के माता-पिता और भाई-बहन भी कुछ ऐसी ही समस्या का सामना करेंगे, उस महिला और उस विड़ीयो बनाने वाले लड़के ने ताउम्र के लिए उस लड़की का चरित्रहनन कर दिया, अफसोस उस महान औरत और उस केमरा मैन लड़के को ये एहसास भी नही होगा, अगर कानून मे अश्लीलता अपराध है तो किसी लड़की का विडियो बनाकर वायरल करना उससे भी बड़ा अपराध है जिससे किसी लड़की या लड़के का पूरा जीवन बरबाद हो जाये, इस विड़ियो को बनाने वाले पर fir होनी चाहिये l 

सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकत को कानून में परिभाषित किया गया है। आईपीसी की धारा-294 के तहत इसके लिए कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।अगर कोई शख्स अश्लील हरकत करता है और इस कारण किसी की भावनाएं आहत होती है तो वह पुलिस से इसकी शिकायत कर सकता है। पुलिस को भी यह देखना होता है कि समाज के परिवेश के हिसाब से कपल या फिर किसी और की हरकत अश्लीलता के दायरे में आती है या नहीं। अगर सार्वजनिक जगह पर कोई अश्लीलता करता है और अपनी हदें पार करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि जगह के हिसाब से अश्लीलता की परिभाषा तय होती है। अगर किसी छोटे शहर अथवा गांव में कपल बांहों में बांहें डालकर चलते हैं या फिर एक दूसरे को गले लगाते हैं या माथे को चुमते है तो लोगों को इससे आपत्ति हो सकती है लेकिन वहीं मेट्रो सिटी, अन्य बड़े सिटी या गोवा आदि इलाके में अगर कपल एक दूसरे को हग करते हैं गाल या माथे पर किस करते है (जो कामुक ना हो ) तो वह अश्लीलता के दायरे से बाहर है।
अगर फिर भी सार्वजनिक जगह पर कोई कपल अश्लीलता करता है या अपनी हदे पार करता है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। ऐसी हरकत करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा-294 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर 3 महीने तक कैद की सजा का प्रावधान है।

वही दूसरी ओर अगर कोई कपल पार्क मे , कार मे या किसी अन्य जगह पर बैठे हुए है और एक-दूसरे से बातचीत में मशगूल है, हसी मजाक कर रहे है तो कोई आम नागरिक सिर्फ यह अवधारणा बनाकर कि वह गलत हरकत कर सकता है, उस पर आरोप नही लगा सकता और ना ही पुलिस अवधारणा के आधार पर कोई कार्रवाई कर सकती है।

संविधान के अनुच्छेद-21 का दायरा काफी बड़ा है। इस अनुच्छेद के तहत हर नागरिक को लाइफ ऐंड लिबर्टी का मूल अधिकार मिला हुआ है। इसका मतलब साफ है कि हर शख्स को यह अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से जिंदगी का निर्वाह कर सकता है। कपल जो बालिग हैं, अपनी मर्जी से एक साथ घूम सकते हैं, साथ रह सकते हैं और चाहें तो शादी कर सकते हैं।

विचारक :- धर्मवीर ठाकुर

समाजों में एक बुनियादी गलती यह की जाती है कि हमने युवाओं के दिमाग में कहीं न कहीं यह बात डाल दी है कि स्त्री एक वस्तु है, एक चीज है, जिस पर...