समाजों में एक बुनियादी गलती यह की जाती है कि हमने युवाओं के दिमाग में कहीं न कहीं यह बात डाल दी है कि स्त्री एक वस्तु है, एक चीज है, जिस पर आप कब्जा कर सकते हैं।
दुनिया में महिलाओं को इन्सान समझने के लिए लोग कितना वक्त लगाएंगे ये तो नहीं पता, लेकिन हम बच्चों को अच्छी परवरिश तो दे ही सकते हैं, ताकि वे महिलाओं को वस्तु न समझें. उन्हें सही समय पर सेक्स एजुकेशन दें, ताकि वो इधर-उधर से गलत चीज़ें न सीखें. सबसे ज़रूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को गुड और बैड टच का मतलब समझाएं और उन्हें आवाज़ उठाने को प्रेरित करें, चुप रहने को नहीं.
पुरुषों द्वारा रेप करने की पहली वजह तो ये है कि हमारी सोसाइटी कितने ही लोगों के लिए पावर दिखाने का माध्यम बन जाती है. ऐसे लोग अपना हक़ जमाकर अपनी एक आइडेन्टिटी क्रिएट करना चाहते हैं. दूसरा कारण है कि अगर कोई लड़की उन्हें पसंद आ जाती है, वो उन्हें लगता है कि वो हर हाल में मिलनी चाहिए, चाहे वो हां कहे या ना. तीसरी अहम वजह है कि वे अपनी काम उत्तेजना को कंट्रोल नहीं कर पाते. न ही वे इसे कंट्रोल करना चाहते हैं. ऐसे लोगों के लिए रेप बदला लेने का माध्यम भी बन जाता है...
सोसाइटी में जो नजरिया है औरतों के प्रति, वो यही है कि अगर वो मॉडर्न है तो उसे लोग 'तैयार' मानते हैं. वो उसके साथ कुछ भी करने के लिए सोचते हैं. हमें सिखाया ही नहीं गया कि लड़कियां भी लड़कों जैसी ही होती हैं, उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ सेक्स नहीं करना चाहिए. ..और पत्नी व्रता बने ....रेप होना बन्द हो जायेगा ...
सभी माता पिता से मेरा निवेदन है....कि अपने बेटो को अच्छी शिक्षा दे ....
विचारक :- धर्मवीर ठाकुर
दुनिया में महिलाओं को इन्सान समझने के लिए लोग कितना वक्त लगाएंगे ये तो नहीं पता, लेकिन हम बच्चों को अच्छी परवरिश तो दे ही सकते हैं, ताकि वे महिलाओं को वस्तु न समझें. उन्हें सही समय पर सेक्स एजुकेशन दें, ताकि वो इधर-उधर से गलत चीज़ें न सीखें. सबसे ज़रूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को गुड और बैड टच का मतलब समझाएं और उन्हें आवाज़ उठाने को प्रेरित करें, चुप रहने को नहीं.
पुरुषों द्वारा रेप करने की पहली वजह तो ये है कि हमारी सोसाइटी कितने ही लोगों के लिए पावर दिखाने का माध्यम बन जाती है. ऐसे लोग अपना हक़ जमाकर अपनी एक आइडेन्टिटी क्रिएट करना चाहते हैं. दूसरा कारण है कि अगर कोई लड़की उन्हें पसंद आ जाती है, वो उन्हें लगता है कि वो हर हाल में मिलनी चाहिए, चाहे वो हां कहे या ना. तीसरी अहम वजह है कि वे अपनी काम उत्तेजना को कंट्रोल नहीं कर पाते. न ही वे इसे कंट्रोल करना चाहते हैं. ऐसे लोगों के लिए रेप बदला लेने का माध्यम भी बन जाता है...
सोसाइटी में जो नजरिया है औरतों के प्रति, वो यही है कि अगर वो मॉडर्न है तो उसे लोग 'तैयार' मानते हैं. वो उसके साथ कुछ भी करने के लिए सोचते हैं. हमें सिखाया ही नहीं गया कि लड़कियां भी लड़कों जैसी ही होती हैं, उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ सेक्स नहीं करना चाहिए. ..और पत्नी व्रता बने ....रेप होना बन्द हो जायेगा ...
सभी माता पिता से मेरा निवेदन है....कि अपने बेटो को अच्छी शिक्षा दे ....
विचारक :- धर्मवीर ठाकुर
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